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पूर्वांचल में 28-29 अक्तूबर को बारिश का अलर्ट, 40 किमी की रफ्तार से चलेंगी हवाएं; कृषि विभाग की एडवाइजरी

मौसम समाचार: बंगाल की खाड़ी में बने गहरे निम्न दबाव (डीप डिप्रेशन) के प्रभाव से वाराणसी, गाजीपुर समेत समूचे पूर्वांचल के जिलों में मौसम का म...

मौसम समाचार: बंगाल की खाड़ी में बने गहरे निम्न दबाव (डीप डिप्रेशन) के प्रभाव से वाराणसी, गाजीपुर समेत समूचे पूर्वांचल के जिलों में मौसम का मिजाज तेजी से बदलने वाला है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), लखनऊ के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, 28 और 29 अक्तूबर को क्षेत्र में मध्यम से भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है। इस दौरान 50 से 90 मिलीमीटर तक जोरदार वर्षा दर्ज की जा सकती है, साथ ही 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है। मौसम के इस अप्रत्याशित बदलाव को देखते हुए कृषि विभाग ने अन्नदाताओं को फसलों के बचाव के लिए अलर्ट जारी किया है।

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Purvanchal Samachar 

कटी धान की फसल को तत्काल ढकें, 28 अक्तूबर से पहले निपटाएं कटाई


कृषि विभाग ने मौसम की गंभीरता को देखते हुए किसानों को विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने किसानों से अपील की है कि खेतों में कटी पड़ी धान की फसल को बिना देरी किए तत्काल सुरक्षित स्थानों या गोदामों में पहुंचाएं अथवा तिरपाल से अच्छी तरह ढक दें, ताकि फसल भीगने से बच सके। जिन किसानों को हार्वेस्टर से धान की कटाई करानी है, वे 28 अक्तूबर से पहले हर हाल में कटाई का काम पूरा करने का प्रयास करें। इसके अलावा मंडी, खलिहान या खुले स्थानों पर रखे अनाज को ऊंचे चबूतरों पर रखकर पॉलीथीन या वाटरप्रूफ कवर से पूरी तरह सुरक्षित करने की सलाह दी गई है।


उर्वरक और कीटनाशक छिड़काव पर रोक, जल निकासी के पुख्ता इंतजाम के निर्देश


कृषि विभाग ने रबी फसलों और सब्जियों की खेती कर रहे किसानों के लिए भी जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं।


जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि सरसों, चना और मटर की बुवाई वाले खेतों में बारिश का पानी जमा न होने दें और जल निकासी की समुचित व्यवस्था पहले से सुनिश्चित कर लें। 28 और 29 अक्तूबर को किसी भी नई फसल की बुवाई, यूरिया-डीएपी जैसे उर्वरकों के प्रयोग और कीटनाशकों के छिड़काव से पूरी तरह परहेज करें, क्योंकि भारी बारिश में दवा और खाद बहने से किसानों को आर्थिक नुकसान हो सकता है। तेज हवाओं को देखते हुए टमाटर और बैंगन के पौधों को बांस-बल्ली का सहारा देने तथा केला व पपीता के बागों को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक प्रबंध करने का सुझाव दिया गया है।